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Himachal Pradesh Mukhyamantri Khet Sanrakshan Yojana हिमाचल प्रदेश मुख्यमंत्री खेत संरक्षण योजना Form:

Himachal Pradesh Mukhyamantri Khet Sanrakshan Yojana
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Himachal Pradesh Mukhyamantri Khet Sanrakshan Yojana हिमाचल प्रदेश मुख्यमंत्री खेत संरक्षण योजना Form

हिमाचल प्रदेश कृषि विभाग के माध्यम से चलाई जा रही गत-वर्षों मुख्यमंत्री खेत संरक्षण योजना 2016 – 17 का विस्तार “मुख्यमंत्री खेती संरक्षण योजना 2020” पुनः आरम्भ कर दी गई है। मुख्यमंत्री कृषि संरक्षण योजना को सभी खण्डों (ब्लॉक्स) में उपलब्ध करवाया गया है। मुख्यमंत्री खेत संरक्षण योजना (Himachal Pradesh Mukhyamantri Khet Sanrakshan Yojana) का लाभ कृषकों के लिए सब्सिडी द्वारा दिया जा रहा है। इसमें किसानों को 80 से 85 प्रतिशत तक की आर्थिक सहायता (सब्सिडी) दी जा रही है।

Himachal Pradesh Mukhyamantri Khet Sanrakshan Yojana खेत संरक्षण योजना

महत्त्वपूर्ण: कृषकों को इस योजना का लाभ उठाने के लिए हिमाचल प्रदेश कृषि विभाग की औपचारिकताओं को पूरा करना होगा। मुख्यमंत्री खेत संरक्षण योजना किसानों और बागवानों दोनों के लिए लाभदायक है।
इस योजना के तहत किसानों को जंगली जानवरों बंदरों, सअरों और अन्य प्रकार के वन्य पशुओं द्वारा की गयी अनावश्यक हानि की समस्या से मुक्ति मिलेगी।

मुख्यमंत्री खेत संरक्षण योजना – लाभ:

इस मुख्यमंत्री खेत संरक्षण योजना के अंतर्गत लाभ उठाने के लिए कृषक को मात्र 20 प्रतिशत राशि ही व्यय करनी पड़ेगी, शेष अनुवृत्ति प्रदेश कृषि विभाग प्रदान करेगा । कृषि भूमि के चहुँ ओर बाड़ में लगी तारों से उत्पन्न झटके से वन्य पशुओं अथवा अन्य मवेशियों को भगाने में सहायता मिलेगी । इसके कारण किसी मनुष्य के लिए किसी भी प्रकार से प्राणांत होने / जान जाने का सङ्कट नहीं होगा। इस बाड़ में अगर कोई खराबी आए तो कंपनी के कर्मचारी स्वंय इसकी मरम्मत करेगें। इस बाड़ को लगाने के लिए किसानों को कुछ औपचारिकताएं पूरी करनी होगी।

मुख्यमंत्री खेत संरक्षण योजना – प्रक्रियात्मक औपचारिकताएं:

मुख्यमंत्री खेत संरक्षण योजना का लाभ उठाने के लिए किसानों को हिमाचल प्रदेश कृषि विभाग की द्वारा प्रयोज्य औपचारिकताएं पूरी करनी होगी। इस प्रयोजन हेतु कृषकों को कृषि विभाग द्वारा प्रदत्त आवेदन प्रपत्र (एप्लीकेशन फॉर्म) भरना पड़ेगा उसके साथ भूमि जमाबंदी (Land Rental) जमीन की जमाबंदी, कृषि भूमि का मानचित्र (Map / Layout) भी लगाना होगा। तत्पश्चात सभी प्रलेखों / दस्तावेज को एकत्र कर किसान उसे अपने ब्लॉक में जमा करवाएं । कृषक द्वारा प्रस्तुत सभी डाक्यूमेंट्स का सत्यापन किया जावेगा संतोषजनक सत्यापन के पश्चात मुख्यमंत्री खेत संरक्षण योजना योग्य कृषकों के प्राप्त होगा।

सामूहिक आधार पर मुख्यमंत्री खेत संरक्षण योजना (Himachal Pradesh Mukhyamantri Khet Sanrakshan Yojana) का लाभ:

हिमाचल प्रदेश मुख्यमंत्री खेत संरक्षण योजना के लिए कृषकों को 20 प्रतिशत तक राशि व्यय करनी पड़ेगी। यदि कोई कृषक स्वयं अकेले इस मुख्यमंत्री खेत संरक्षण योजना का लाभ उठाने उठाने हेतु धन के अभाव में में व्यय वहन करने ने असमर्थ अथवा अक्षम है तो ऐसी स्थिति में किसान तीन लोगों का समूह बनाकर इस योजना का लाभ उठा सकते है तथा समूह में इस मुख्यमंत्री खेत संरक्षण योजना के अंतर्गत किसानों को मात्र 15 प्रतिशत राशि ही देनी पड़ेगी।

बिजली के व्यय से मुक्ति:

मुख्यमंत्री खेत संरक्षण योजना के तहत खेतों के चारों और सोलर लाइट से चलने वाले बाड़ लगाया जाएगा। इससे किसानों को विद्युत (शक्ति) विपत्र / बिजली का बिल (Electricity Bill) से भी मुक्ति मिलेगी। योजना के तहत कंपनी स्वंय किसानों के खेतों के चारो ओर इस बाड़ लगाएंगे। इसके अतिरिक्त इसका प्रयोग करने की विधि भी किसानों को समझायी जावेगी ।

01) मुख्यमंत्री खेत संरक्षण परियोजना का औचित्य:

पशु नियंत्रण:
क) घरेलू पशुओं को रखने के लिए।
ख) जंगली जानवरों और वर्मंस को बाहर रखना।
ग) पशुओं के विभिन्न समूहों को अलग करना।
घ) फसलों और पाश्चर के राशनिंग की अनुमति देना।
च) एरोडिंग क्षेत्रों, पेड़ों, नदियों और सड़कों को बंद करने के लिए।

बिजली बाड़ लगाने के लाभ:
क) सस्ती।
ख) आसानी से निर्माण और बनाए रखा।
ग) हल्के वजन और आसानी से पहुँचाया।
घ) कम शारीरिक संपर्क के कारण टिकाऊ।
च) आसानी से संशोधित।
छ) कम पशु छिपाना और नुकसान को कम करना।
ज) अनधिकार प्रवेश करने वाला (Trespassers) और लूट-मार करने वाला / हिंसक पशु (Predators) को निरोध।

Himachal Pradesh Mukhyamantri Khet Sanrakshan Yojana परियोजना के घटक:

तीन प्रकार के विद्युत बाड़ हैं, निम्नानुसार हैं:
01) इलेक्ट्रिक ग्रिड पावर्ड घटक (कंपोनेंट)।
02) बैटरी पावर्ड घटक।
03) सौर ऊर्जा संचालित घटक।

प्रत्येक संचालित घटक एक विद्युत बाड़ चार्जर के रूप में ज्ञात घटक पर निर्भर करता है ताकि आने वाले चार्ज को बिजली के सुरक्षित रूप में परिवर्तित किया जा सके।

01) नियमित बिजली चालित बाड़ लगाना:
इसमें एक एनर्जाइज़र, बाड़ निगरानी उपकरण, इन्सुलेशन सामग्री, डंडे (एक दूसरे से 05 मीटर की औसत दूरी पर और 1.50 मीटर की दूरी 2.10 मीटर ऊँचाई से ऊपर के स्तर तक) और हॉरर वायर की 05 से 09 लाइनें हैं। डंडे एमएस हॉट डुबकी जस्ती प्रकार, एमएस इको-चित्रित, आरसीसी या लकड़ी के हो सकते हैं।
02) सौर इलेक्ट्रिक संचालित बाड़ लगाना:
इसमें एक एनर्जाइज़र, सोलर पैनल, बैटरी, बाड़ की निगरानी करने वाले उपकरण, इंसुलेशन मटीरियल, पोल (एक दूसरे से 05 मीटर की औसत दूरी पर और 1.50 मीटर से 2.10 मीटर की ऊँचाई से ऊपर के ग्राउंड लेवल पर) और क्षैतिज की 05 से 09 लाइनें हैं तार। डंडे एमएस हॉट डुबकी जस्ती प्रकार, एमएस इको-चित्रित, आरसीसी या लकड़ी के हो सकते हैं।

इलेक्ट्रिक इंपल्स एक एनर्जाइज़र द्वारा उत्पन्न होता है। एनर्जाइज़र प्रत्येक 0.9 से 1.20 सेकंड में एक बार लगभग 8 केवी के उच्च वोल्टेज आवेगों का उत्पादन करता है। आवेग एक सेकंड से 0.1 सेकंड के लगभग 300 मिलियन तक रहता है और 10 एमए तक का करंट होता है। करंट सप्लाई आम तौर पर सोलर पावर द्वारा या एक जनरल इलेक्ट्रिक सप्लाई सिस्टम से 12V बैटरी चार्जेड या तो उपलब्ध है। इसलिए, शॉक पूरी तरह से सुरक्षित है।

चयन के लिए परियोजना क्षेत्र, लाभार्थी और मानदंड:

01) परियोजना हिमाचल प्रदेश के सभी जिलों में मांग और कृषि समुदाय की आवश्यकता के अनुसार लागू की जाएगी।
02) किसानों के पास राज्य में प्रति एकड़ रिकॉर्ड के रूप में खेती / खेती योग्य भूमि होनी चाहिए और भूमि का एक कॉम्पैक्ट टुकड़ा होना चाहिए।
03) वित्तीय सहायता व्यक्तिगत किसानों और किसानों के समूह दोनों को प्रदान की जाएगी।
04) सभी किसान अपनी प्रतिक्रियाशील कृषि भूमि में, जो अपनी व्यक्तिगत खेती की जमीन पर सोलर या रेगुलर इलेक्ट्रिक फेंसिंग सिस्टम स्थापित करने का इरादा रखते हैं, में सहायता के लिए पात्र बने हुए हैं।
05) किसानों को आजीविका सहायता के लिए वरीयता दी जाएगी, जिसकी आजीविका का स्रोत कृषि और बागवानी क्षेत्र है।
06) सामुदायिक खेती प्रणाली को प्राथमिकता दी जाएगी और कानूनी शिकायत से बचने के लिए सांस्कृतिक क्षेत्र वे होंगे जहां पर खेती की गई भूमि एक कॉम्पैक्ट पैच है।

Himachal Pradesh Mukhyamantri Khet Sanrakshan Yojana खेत संरक्षण योजना Form आवेदन पत्र


परियोजना सहायता प्राप्त करने के लिए सोलर / रेगुलर इलेक्ट्रिक पावर्ड फेंसिंग सिस्टम स्थापित करने के इच्छुक किसानों को परियोजना संस्थापन प्राधिकरण (पीआईए) के माध्यम से, कृषि संबंधित उपनिदेशक, जो परियोजना मंजूरी प्राधिकरण है, के साथ सहायक राजस्व पत्रों के साथ आवेदन जमा करना होगा। विकास खंड, अर्थात्, विषय-वस्तु विशेषज्ञ, निर्धारित आवेदन पत्र (अनुबंध- I) पर। किसानों को नियमित रूप से बाड़ और घोषणा को बनाए रखने के संबंध में न्यायिक कागज पर स्व-सत्यापित शपथ पत्र के रूप में एक उपक्रम प्रस्तुत करना होगा कि “मैं किसी भी मौत या मानव, जंगली जानवरों, या संपत्ति के कारण नुकसान के लिए पूरी तरह से जिम्मेदार होगा। सौर / नियमित विद्युत चालित बाड़ लगाने के लिए सौर ऊर्जा बाड़ लगाने का कुप्रभाव (अनुलग्नक – III)।

निर्धारित आवेदन पत्र जिला स्तर, खंड स्तर और सर्कल स्तर पर विभाग के सभी कार्यालयों में उपलब्ध रहेंगे। किसानों को ब्लॉक स्तर पर क्षेत्र के कृषि विस्तार अधिकारी, कृषि विकास अधिकारी, विषय-वस्तु विशेषज्ञ के लिए विधिवत पूर्ण आवेदन प्रस्तुत करना होगा।

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संपर्क सूत्र: मुख्यमंत्री खेत संरक्षण योजना 2020 का लाभ लेकर सौर-बाड़ लगाने के लिए इच्छुक कृषक अपने निकटतम खण्ड विकास कार्यालय (Block Development Office) में कृषि विभाग के विषयवाद विषेषज्ञ, कृषि विकास अधिकारी अथवा जिला कृषि अधिकारी, पालमपुर या उपनिदेशक कृषि से स्वयं अथवा दूरभाष अंक संख्या 01894-230528, 230865 पर संपर्क कर सकते हैं । हिमाचल प्रदेश कृषि विभाग समय समय पर किसानों को जागरूक और कृषि विभाग की योजनाओं से अवगत करवाने के लिए विभाग समय-समय पर जागरूकता कैंप और प्रशिक्षण कार्यक्रमों का आयोजन करता है।

Himachal Pradesh Mukhyamantri Khet Sanrakshan Yojana

Website of the Department- www.hpagriculture.com/

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