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Pradhan Mantri Khanij Kshetra Kalyan Yojana PMKKKY प्रधानमंत्री खनिज क्षेत्र कल्याण योजना

Pradhan Mantri Khanij Kshetra Kalyan Yojana
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Pradhan Mantri Khanij Kshetra Kalyan Yojana PMKKKY प्रधानमंत्री खनिज क्षेत्र कल्याण योजना

प्रधानमंत्री खनिज क्षेत्र कल्याण योजना (पीएमकेकेकेवाई) [The Prime Minister Mineral Field Welfare Scheme ( Pradhan Mantri Khanij Kshetra Kalyan Yojana )] के अंतर्गत स्थापित डिस्ट्रिक्ट मिनेरल फाउंडेशन (डीएमएफ) निधि धन प्रदेश में विभिन्न जनकल्याण हेतु अवयव, उदाहरणार्थ, पेयजल, पर्यावरण संरक्षण, स्वास्थ्य सुविधा, शिक्षा, महिला बाल कल्याण एवं स्वच्छता पर व्यय किया जाता है । जनपद / ज़िला स्तर पर प्रधानमंत्री खनिज क्षेत्र कल्याण पोर्टल पर दोनों उद्दिनांकित (Updated) तथा अद्यतनीकरण (Updating) आंकड़े प्रविष्टि (डेटा एंट्री) का कार्य निष्पादन के संग प्रगति है।

Pradhan Mantri Khanij Kshetra Kalyan Yojana प्रधानमंत्री खनिज क्षेत्र कल्याण योजना

खनन से प्रभावित लोगों और क्षेत्रों के हित के लिए माइनिंग एंड मिनेरल एक्ट अस्तित्व में है। प्रधानमंत्री खनिज क्षेत्र कल्याण योजना के अधीन डिस्ट्रिक्ट मिनेरल फाउंडेशन (District Mineral Foundation) / जनपद खनिज प्रतिष्ठान की स्थापना की गई है जिसका कार्यान्वयन के पश्चात कार्यरत सक्रिय है। ( Pradhan Mantri Khanij Kshetra Kalyan Yojana ) (PMKKKY)– प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 1.0 (प्रथम कार्यकाल) केंद्र सरकार 2015 ने खनन से सीधे अथवा परोक्ष रूप से खदान / खनन प्रभावित क्षेत्रों (Mining-Affected Areas) में रहने वाले लोगों के जीवन में परिवर्तन हेतु प्रधानमंत्री खनिज क्षेत्र कल्याण योजना (पीएमकेकेकेवाई) का शुभारम्भ सितंबर 2015 में किया गया था ।

इस कार्यक्रम से खनन से संबंधित परिचालनों से प्रभावित लोगों तथा क्षेत्रों का कल्याण किया जाता है । इसमें डिस्ट्रिक्ट मिनेरल फाउंडेशन (डीएमएफ) द्वारा उपलब्ध कराई गई निधि का उपयोग किया जाएगा । डीएमएफ खनन संबंधित कार्यों से प्रभावित देश के सभी जनपदों में खान एवं खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन अधिनियम 2015 के अंतर्गत बनाए गए थे ।

Pradhan Mantri Khanij Kshetra Kalyan Yojanaपीएमकेकेकेवाई योजना का उद्देश्य – संक्षिप्त केंद्र-बिंदु:

01) खनन प्रभावित क्षेत्रों में विभिन्न विकास तथा कल्याणकारी परियोजनाओं / कार्यक्रमों को लागू करना । ये राज्य सरकार तथा केंद्र सरकार की वर्तमान समय में चल रही योजनाओं / परियोजनाओं की सम्पूरक भी होंगी।
खनन जनपदों में वहां रहने वाले लोगों के स्वास्थ्य और सामाजिक अर्थव्यवस्था, पर्यावरण पर खनन के दौरान तथा अनुवर्ती प्रतिकूल प्रभाव को कम करना / दूर करना शामिल हैं ।
02) खनन क्षेत्रों में प्रभावित लोगों के लिए दीर्घ-अवधि स्थिर (Durable) जीवनयापन सुनिश्चित करना । जीवन की गुणवत्ता में ठोस सुधार सुनिश्चित करते हुए जीवन के सभी पहलुओं को शामिल किया जा चूका है । पेयजल की आपूर्ति, स्वच्छता, शिक्षा, कौशल विकास, महिला और बाल विकास, वरिष्ठ तथा दिव्यांग जन / विकलांग जनों का कल्याण, कौशल विकास और पर्यावरण संरक्षण; जैसे उच्च‍ प्राथमिकता वाले क्षेत्र को इस निधि का कम से कम 60 प्रतिशत हिस्सा प्रदान किया जाता है।
03) हितकर जीवन यापन वातावरण बनाने के लिए निधि की शेष राशि मार्ग (पथ) (Roads), सेतु (पुल) (Bridges), रेलवे (Railway), जलमार्ग परियोजनाओं (Orthodrome Projects / Water-Course Projects) (ऑथोड्रोम प्रोजेक्ट्स), सिंचाई व वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों (Irrigation and Alternative Sources) को बनाने पर खर्च की जाती है ।

पीएमकेकेकेवाई के कार्यान्वयन में जनपद खनिज प्रतिष्ठान की भूमिका:

केंद्र सरकार ने एमएमडीआर अधिनियम 1957 की धारा 20ए के अधीन पीएमकेकेकेवाई का कार्यान्वयन सुनिश्चित करने के लिए दिशा-निर्देशों (Guidelines) का उल्लेख करते हुए राज्य सरकारों को निदेश जारी किए और राज्यों को यह निर्देश दिया गया कि डीएमएफ के लिए बनाए गए नियमों में इन्हें शामिल करे ।

केंद्र सरकार के निर्देशानुसार डीएमएफ कार्यप्रणाली में पूरी पारदर्शिता का ध्यान रखते हुए, उनके द्वारा चलाई विभिन्न परियोजनाओं और योजनाओं के बारे में समय-समय पर विवरणी (रिपोर्ट) देंगी।

प्रधानमंत्री खनिज योजना कल्याण योजना (PMKKKY) अथवा (प्रधान मंत्री खनिज क्षेत्र कल्याण योजना (PMMFWS) के विषय केंद्र सरकार द्वारा निर्गत व कार्यान्वयित केंद्र-बिन्दु:

प्रधानमंत्री खनीज कल्याण योजना (PMKKKY) (प्रधान मंत्री खनिज क्षेत्र कल्याण योजना (PMMFWS) को जिला खनिज फाउंडेशन द्वारा अर्जित निधि का उपयोग संबंधित जनपदों के जनपद खनिज प्रतिष्ठानों डिस्ट्रिक्ट मिनेरल फॉउण्डेशन्स (District Mineral Foundations) द्वारा कार्यान्वित किया जाएगा।

प्रधानमंत्री खनीज क्षेत्र कल्याण योजना / प्रधानमंत्री खनिज क्षेत्र कल्याण योजना – समग्र उद्देश्य:

01) PMKKKY / PMMFWS के समग्र उद्देश्य कार्यान्वित रहेंगे:

क) खनन प्रभावित क्षेत्रों में विभिन्न विकासात्मक और कल्याण परियोजनाओं / कार्यक्रमों को लागू करना (कार्यान्वयन) । ये परियोजनाएं / कार्यक्रम राज्य सरकार और केंद्र सरकारों की मौजूदा चल रही योजनाओं / परियोजनाओं के पूरक होंगे;

ख) खनन जिलों में पर्यावरण, स्वास्थ्य तथा सामाजिक-अर्थशास्त्र पर लोगों के लिए खनन (न्यूनतमकरण) / शमन (शमन) प्रतिकूल प्रभाव, दौरान और बाद के खनन; तथा
ग) खनन क्षेत्रों में प्रभावित लोगों के लिए दीर्घकालीन स्थायी आजीविका सुनिश्चित करना (सुनिश्चित करना)।प्रभावित क्षेत्रों और लोगों की पहचान (प्रधानमंत्री होने के लिए) प्रधानमंत्री खांजीक्षेत्र कल्याण योजना / प्रधानमंत्री खनिज क्षेत्र कल्याण योजना के अंतर्गत आच्छादित क्षेत्र:

1) प्रभावित क्षेत्र:

अ) (खनन के कारण) सीधे प्रभावित क्षेत्र:
जहाँ प्रत्यक्ष खनन (डायरेक्ट माइनिंग) से जुड़े ऑपरेशंस अन्य विषयों में, जैसे – खुदाई, माइनिंग, ब्लास्टिंग, बेनेफिशियेशन एंड वेस्ट डिस्पोजल (ओवरबर्डन डंप्स, टेलिंग पॉन्ड्स, ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर आदि) समाविष्ट हैं।
क) खदान और ग्राम पंचायत कॉन्ग्लोमेरेट जिसके भीतर खदानें स्थित हैं और संचालन करती हैं। इस तरह के खनन क्षेत्र राज्य पर पड़ोसी गाँव, ब्लॉक या जिले तक विस्तारित हो सकते हैं।
ख) खान या खदान के क्लस्टर से ऐसे दायरे में एक क्षेत्र, जैसा कि राज्य सरकार द्वारा निर्दिष्ट किया जा सकता है, भले ही यह जिला चिंतित या निकटवर्ती जिले के भीतर हो।
ग) जिन गांवों में खान द्वारा विस्थापित परिवारों को परियोजना प्राधिकरणों द्वारा पुन: बसे / पुनर्वासित किया गया है।
घ) ऐसे ग्राम जो आर्थिक क्षेत्रों की आर्थिक जरूरतों को पूरा करने के लिए खनन क्षेत्रों पर महत्वपूर्ण रूप से निर्भर हैं और परियोजना क्षेत्रों पर भोगाधिकार (Usufruct) तथा पारंपरिक अधिकार हैं, उदाहरण के लिए, पशुचराई के लिए, लघु वन उपज का संग्रह, आदि, प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित क्षेत्रों पर विचार किया जाना चाहिए।

ब) अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित क्षेत्र:
वे क्षेत्र, जहां खनन से संबंधित कार्यों के कारण आर्थिक, सामाजिक और पर्यावरणीय परिणामों के कारण स्थानीय जनसंख्या प्रतिकूल रूप से प्रभावित होती है। खनन के प्रमुख नकारात्मक प्रभाव जल, मृदा और वायु की गुणवत्ता के बिगड़ने, प्रवाह के प्रवाह में कमी और भूमिगत जल की कमी, कंजेशन और प्रदूषण के कारण हो सकते हैं।

स) जनपद खनिज प्रतिष्ठान (डिस्ट्रिक्ट मिनेरल फाउंडेशन) खनन से संबंधित कार्यों द्वारा ऐसे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित क्षेत्रों की अद्यतन सूची तैयार और बनाए रखेगा।

2) प्रभावित लोग:
अ) निम्नलिखित को सीधे प्रभावित व्यक्तियों के रूप में शामिल किया जाना चाहिए:

क) प्रत्यक्ष प्रभावित परिवार, भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और पुनर्वास अधिनियम 2013 में उचित मुआवजा और पारदर्शिता की धारा 3 (सी) के तहत परिभाषित;
ख) ‘विस्थापित परिवार’ जैसा कि भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और पुनर्वास अधिनियम 2013 में उचित मुआवजे और पारदर्शिता के अनुभाग 3 (के) के तहत परिभाषित किया गया है;
ग) सम्बद्ध ग्राम सभा द्वारा उचित पहचान के रूप में कोई अन्य।

ब) खनन से प्रभावित व्यक्तियों में वे लोग शामिल होने चाहिए, जिनके पास खनन की जा रही भूमि पर कानूनी और व्यावसायिक अधिकार हैं, और उन लोगों के लिए भी जो फलोपभोग (Usufruct) एवं पारंपरिक अधिकार हैं ।
स) जहाँ तक संभव हो, ग्राम सभा के स्थानीय / निर्वाचित प्रतिनिधियों के परामर्श से प्रभावित परिवारों की पहचान की जानी चाहिए, ।
द) जनपद खनिज प्रतिष्ठान (District Mineral Foundation) ऐसे प्रभावित व्यक्तियों / स्थानीय समुदायों की अद्यतित सूची तैयार और बनाए रखेगा।

Pradhan Mantri Khanij Kshetra Kalyan Yojana पीएमकेकेकेवाई का दायरा

प्रधान मंत्री खानिजात कल्याण कल्याण योजना Pradhan Mantri Khanij Kshetra Kalyan Yojana यहाँ सूचीबद्ध गतिविधियों को कवर कर सकती है:

उच्च प्राथमिकता वाले क्षेत्र:
के अंतर्गत इन प्रमुखों के तहत पीएमकेकेकेवाई फंड का न्यूनतम 60% (उपयोग में):
अ) पेय-जल आपूर्ति: केंद्रीकृत शुद्धिकरण प्रणाली, जल उपचार संयंत्र, स्थायी / अस्थायी जल वितरण नेटवर्क जिसमें पेयजल के लिए स्टैंड-अलोन सुविधाएं, पाइप्ड जल आपूर्ति प्रणाली की परतें शामिल हैं।
ब) पर्यावरण संरक्षण और प्रदूषण नियंत्रण के उपाय:
प्रयास उपचार संयंत्र, नदियों, झीलों, तालाबों, भूजल के प्रदूषण की रोकथाम, इस क्षेत्र के अन्य जल स्रोत, खनन संचालन और डंप, खान जल निकासी प्रणाली, खदान प्रदूषण निवारण प्रौद्योगिकी और उपायों के कारण वायु और धूल प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए उपाय। पर्यावरण के अनुकूल और सतत खान विकास के लिए आवश्यक खदानें तथा अन्य वायु, जल और भूतल प्रदूषण नियंत्रण तंत्रों के काम करने या छोड़ने के लिए।
स) स्वास्थ्य देखभाल: प्रभावित क्षेत्रों में प्राथमिक / माध्यमिक स्वास्थ्य देखभाल सुविधाओं के निर्माण पर ध्यान दिया जाना चाहिए। केवल स्वास्थ्य सेवा (हेल्थ केयर) इंफ्रास्ट्रक्चर के निर्माण पर बल नहीं दिया जाना चाहिए, बल्कि ऐसी सुविधाओं को प्रभावी बनाने के लिए आवश्यक स्टाफिंग, उपकरण और आपूर्ति के प्रावधान पर भी होना चाहिए ।

उस सीमा तक, प्रयास स्थानीय निकायों, राज्य और केंद्र सरकारों के मौजूदा स्वास्थ्य देखभाल अवसंरचना के साथ परामर्श और काम में होना चाहिए। खनन से संबंधित बीमारियों और रोगों की देखभाल के लिए आवश्यक विशेष इन्फ्रास्ट्रक्चर डिजाइन करने के लिए नेशनल इंस्टीट्यूट ऑव माइनर्स हेल्थ (National Institute of Miners’ Health) (NIMH) के साथ उपलब्ध विशेषज्ञता भी तैयार की जा सकती है। खनन प्रभावित व्यक्तियों के लिए स्वास्थ्य देखभाल के लिए समूह सुरक्षा (बीमा) योजना / ग्रुप इन्सुरेंस स्कीम (जीआईएस) को लागू किया जा सकता है।

घ) शिक्षा: स्कूल भवनों का निर्माण, अतिरिक्त कक्षा कक्ष, प्रयोगशालाएँ, पुस्तकालय, कला और शिल्प कक्ष, शौचालय ब्लॉक, दूरस्थ क्षेत्रों में छात्रों / शिक्षकों के लिए पीने के पानी के लिए आवासीय छात्रावास, खेल अवसंरचना, शिक्षकों का जुड़ाव (अन्य सहायक कर्मचारी), लर्निंग सेट-अप, परिवहन सुविधाओं की अन्य व्यवस्थाएं (बस / वैन / साइकिल / रिक्शा, आदि) और पोषण संबंधी कार्यक्रम।

च) महिलाओं और बच्चों का कल्याण:
मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, कुपोषण, संक्रामक रोगों, आदि के मुद्दों / समस्याओं के समाधान के लिए विशेष कार्यक्रम प्रधानमंत्री खांजीक्षेत्र कल्याण योजना के तहत उठाए जा सकते हैं।

च) वृद्ध जनों व दिव्यांगों (विकलांग लोगों) का कल्याण: वृद्ध और विकलांग लोगों के कल्याण के लिए विशेष कार्यक्रम।

छ) कौशल विकास: स्थानीय रूप से योग्य व्यक्तियों के लिए आजीविका सहायता, आय सृजन और आर्थिक गतिविधियों के लिए कौशल विकास। परियोजनाओं / योजनाओं में प्रशिक्षण, कौशल विकास केंद्र का विकास, स्व-रोजगार योजनाएं, स्व-सहायता समूहों (एसएचजी) का समर्थन और ऐसी स्व-नियोजन / स्व-रोजगार (Self-Employment) आर्थिक गतिविधियों के लिए अग्रेषित और पिछड़े संबंधों का प्रावधान शामिल हो सकते हैं।

ज) स्वच्छता: संग्रह, परिवहन और अपशिष्ट का निपटान, सार्वजनिक स्थानों की सफाई, उचित जल निकासी और सीवेज उपचार संयंत्र का प्रावधान, मल कीचड़ के निपटान के लिए प्रावधान, शौचालय और अन्य संबंधित गतिविधियों का प्रावधान।

अन्य प्राथमिकता वाले क्षेत्र – 40% तक पीएमकेकेकेवई फण्ड का उपयोग / उपयोग किया जाना / अनुवर्ती प्रमुखों के तहत उपयोग के लिए:

a) भौतिक अवसंरचना: आवश्यक भौतिक अवसंरचना प्रदान करना, अर्थात, पथ / मार्ग (सड़क) (Roads / Path), सेतु (पुल) (Bridges), रेलवे (Railway) और जलमार्ग (Water-Course) परियोजनाएं।
ख) सिंचाई: सिंचाई के वैकल्पिक स्रोत विकसित करना, उपयुक्त और उन्नत सिंचाई तकनीकों को अपनाना।
ग) ऊर्जा और वाटरशेड विकास: ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोत का विकास (माइक्रो-हाइडल सहित) और वर्षा-जल संचयन प्रणाली। बागों का विकास, समेकित खेती और आर्थिक वानिकी और कैचमेंट की बहाली।
डी) खनन जिलों में पर्यावरण गुणवत्ता बढ़ाने के लिए कोई अन्य उपाय।

Pradhan Mantri Khanij Kshetra Kalyan Yojana सामान्य दिशानिर्देश:

क) प्रधान मंत्री खन्जी क्षेत्र कल्याण योजना (पीएमकेकेकेवाई) (The Prime Minister Mineral Field Welfare Scheme (पीएमएमएफडब्ल्यूएस) के अंतर्गत विकास तथा कल्याणकारी गतिविधियाँ, पूर्ववर्ती योजनाओं / परियोजनाओं को लागू करने की प्रकृति में, जहाँ तक संभव हो, होनी चाहिए। राज्य सरकार के साथ-साथ केंद्र सरकार द्वारा वित्त पोषित किया जा रहा है। ‘पॉल्यूटर पेस प्रिन्सीप्ल’ (Polluter Pays Principle) के अंतर्गत होने वाली गतिविधियों को प्रधानमंत्री खनिज क्षेत्र कल्याण योजना के अधीन नहीं लिया जाना चाहिए। प्रयास राज्य सरकार और जनपद योजनाओं के साथ अभिसरण प्राप्त करने के लिए किए जाएंगे, ताकि जनपद खनिज प्रतिष्ठान / डिस्ट्रिक्ट मिनेरल फाउंडेशन द्वारा उठाए गए कार्यकलाप विकास व कल्याण गतिविधियों को पूरक हों और राज्य योजना के लिए अतिरिक्त बजटीय आयव्ययक संसाधन (बड्जेटरी रिसोर्सेज) के रूप में व्यवहार रूप में प्रयुक्त किए जाएं।
ख) राज्य सरकार द्वारा निर्धारित एक ऊपरी सीमा के लिए फाउंडेशन की वार्षिक प्राप्तियों (Receipts) के 5% से अधिक नहीं होने वाली राशि का उपयोग फाउंडेशन के प्रशासनिक, पर्यवेक्षी और उपरि लागतों के लिए किया जा सकता है। जहां तक ​​संभव हो, पीएमकेकेकेवाई के अंतर्गत नो टेम्पोरेरी (अस्थायी न) / परमानेंट पोस्ट (स्थायी पद) बनाई जानी चाहिए। जनपद खनिज फाउंडेशन द्वारा किसी भी अस्थायी / स्थायी पदों और वाहन की खरीद राज्य सरकार के पूर्व अनुमोदन के लिए कहेंगे। हालाँकि, न्यूनतम आवश्यक स्टाफ अनुबंधित आधार पर संलग्न किया जा सकता है।
ग) यदि एक जनपद में एक खदान का प्रभावित क्षेत्र दूसरे जिले के अधिकार क्षेत्र में आता है, तो डिस्ट्रिक्ट मिनेरल फाउंडेशन द्वारा खदान से एकत्र की गई राशि का ऐसा प्रतिशत, जैसा कि सरकार द्वारा तय किया जा सकता है, को अन्य सम्बद्ध जनपद प्रतिष्ठान में हस्तांतरित किया जाएगा। अन्य जिला ऐसे क्षेत्रों में गतिविधियां करने से संबंधित हैं।

एक परियोजना जो प्रभावित क्षेत्र / लोगों के लाभ के लिए है, लेकिन राज्य की पूर्व स्वीकृति प्राप्त करने के बाद प्रधान मंत्री खन्जीक्षेत्र कल्याण योजना (प्रधान मंत्री खनिज क्षेत्र कल्याण योजना) के तहत जिले की भौगोलिक सीमा से परे स्ट्रेच लिया जाना चाहिए। सरकार। केस-टू-केस बेसिस पर फंड यूटिलाइजेशन के लिए प्राथमिकता के संबंध में निर्दिष्ट सीमा से अधिक कॉमन इन्फ्रास्ट्रक्चर जैसे मार्ग, सेतु आदि के विकास की परियोजनाएं, परियोजनाओं के लिए भी ली जा सकती हैं। जनपद के लिए महत्व। राज्य सरकार के पूर्व अनुमोदन को निधि उपयोग की सीमा से अधिक ऐसे कार्यों को करने से पहले, केंद्र सरकार को सूचित करने की आवश्यकता है।

द) स्थायी आजीविका प्रदान करने के लिए वार्षिक प्राप्तियों का एक उचित योग को अक्षय निधि (एंडोमेंट फंड) के रूप में रखा जाना चाहिए।

3) अनुसूचित क्षेत्रों के लिए विशेष प्रावधान: प्रधानमंत्री खनिज कल्याण कल्याण योजना (पीएमकेकेकेवाई) (प्रधानमंत्री खनिज क्षेत्र कल्याण योजना (पीएमएमएफडब्ल्यूवाई) के उपयोग के लिए अपनाई जाने वाली प्रक्रिया (अनुसूचित क्षेत्रों में निधि) अनुच्छेदों के तहत प्रदान किए गए प्रावधानों द्वारा निर्देशित होगी। 244 अनुसूचित क्षेत्र और जनजातीय क्षेत्रों के प्रशासन और पंचायत कलस्टर (अनुसूचित क्षेत्रों तक विस्तार) अधिनियम 1996 और अनुसूचित जनजाति और अन्य पारंपरिक वन निवासियों के प्रशासन से संबंधित भारतीय गणराज्य के संविधान की अनुसूची V और अनुसूची VI के साथ पढ़ें। (वन अधिकार की मान्यता) अधिनियम 2006।

अनुसूचित क्षेत्रों के भीतर स्थित खनन से प्रभावित गांवों के संबंध में:

1) ग्राम सभा की स्वीकृति आवश्यक रहेगी:
क) सभी योजनाओं / योजनाओं, कार्यक्रमों और परियोजनाओं के लिए पीएमकेकेकेवाई / पीमएमफडब्ल्यूएस) के अंतर्गत लिया जाएगा।
ख) सरकार के मौजूदा दिशानिर्देशों के तहत लाभार्थियों की पहचान।

2) जनपद खनिज प्रतिष्ठान के अंतर्गत खदान प्रभावित सम्बद्ध ग्राम में प्रधानमंत्री खनिज क्षेत्र कल्याण योजना (पीएमकेकेकेवाई) (प्रधान मंत्री खनिज क्षेत्र कल्याण योजना (पीएमएमएफडब्ल्यूएस) के अंतर्गत कार्य में संलग्न निर्माण रिपोर्ट पर प्रत्येक वित्तीय वर्ष के पूरा होने के बाद ग्राम सभा को प्रस्तुत करने की आवश्यकता पड़ेगी)

3ग्राम सभा के पास पंचायत क्लस्टर (अनुसूचित क्षेत्रों तक विस्तार) अधिनियम 1996 (वर्ष 1996 का अधिनियम 40) के प्रावधान के कार्यान्वयन के उद्देश्य से इसका समान अर्थ होगा।

4) निर्माण / संविदा का कार्यान्वयन-
i) इस तरह की प्रक्रियाओं के लिए संबंधित राज्य सरकारों द्वारा निर्धारित नियमावली के अनुसरण जनपद खनिज प्रतिष्ठान / जिला खनिज प्रतिष्ठान (डिस्ट्रिक्ट मिनेरल फाउंडेशन) द्वारा कार्य / माल की खरीद की जा सकती है।
ii) सभी अभिकर्ताओं / एजेंसियों और लाभार्थियों को विकास निधि (Development Fund) का हस्तांतरण उनके अधिकोष लेखा (बैंक अकाउंट) में होगा।

5. पारदर्शिता का अनुपालन-
1) प्रत्येक जनपद खनिज प्रतिष्ठान (डिस्ट्रिक्ट मिनेरल फाउंडेशन) एक वेबसाइट तैयार करेगा और उसका रखरखाव करेगा, जिसके आधार पर, अंतर-सूचना, तथा उसके द्वारा निम्नलिखित सूचनाओं को प्रदर्शित किए जाने के साथ अद्यतन करते रहेंगे:

i) डीएमएफ (यदि कोई हो) के जिला खनिज फाउंडेशन / निकायों की संरचना का विवरण।
ii) खनन के कारण क्षेत्रों और लोगों की सूची प्रभावित हुई।
iii) पट्टियों और अन्य से प्राप्त सभी योगदान का त्रैमासिक विवरण।
iv) जिला खनिज फाउंडेशन के सभी बैठक एजेंडा, मिनट और एक्शन टेकन रिपोर्ट (एटीआर)।
v) वार्षिक योजनाएं और बजट, कार्य आदेश, वार्षिक रिपोर्ट।
vi) ऑनिंग वर्क्स की ऑनलाइन स्थिति: प्रधानमंत्री खनिज क्षेत्र कल्याण योजना (पीएमकेकेकेवाई) (प्रधानमंत्री खनिज क्षेत्र कल्याण योजना (पीएमएमएफडब्ल्यूएस) के तहत किए जा रहे सभी परियोजनाओं / कार्यक्रमों की कार्यान्वयन स्थिति / प्रगति वेबसाइट पर उपलब्ध कराई जानी चाहिए। कार्य का विवरण, लाभार्थियों का विवरण, अनुमानित लागत, कार्यान्वयन एजेंसियों का नाम, अंतिम तिथि के लिए अपेक्षित कार्य और कार्य की समाप्ति, वित्तीय और भौतिक प्रगति की अपेक्षित तिथि आदि।
vii) विभिन्न कल्याण कार्यक्रमों के तहत लाभार्थियों की सूची।
viii) सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम (Right To Information Act) के अंतर्गत स्वैच्छिक प्रकटीकरण।

6) लेखा परीक्षा:
डिस्ट्रिक्ट मिनेरल फाउंडेशन (जनपद खनिज प्रतिष्ठान) के लेखा विवरणों को प्रत्येक वर्ष जिला खनिज फाउंडेशन द्वारा नियुक्त चार्टर्ड अकाउंटेंट द्वारा, या जैसा कि राज्य सरकार निर्दिष्ट कर सकती है, ऐसे अन्य तरीके से अंकेक्षण किया जाएगा और इसकी विवरणी (रिपोर्ट) वार्षिक रूप से सार्वजनिक क्षेत्र (डोमेन) में रखी जाएगी।

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7) वार्षिक विवरण (एनुअल रिपोर्ट):
a) प्रतिवर्ष, वित्तीय वर्ष के समापन की तिथि से तीन माह के भीतर, जनपद खनिज प्रतिष्ठान / डिस्ट्रिक्ट मिनेरल फाउंडेशन संबंधी वित्तीय वर्ष (Respective Financial Year) के लिए अपनी गतिविधियों पर एक वार्षिक विवरणी (एनुअल रिपोर्ट) तैयार करने और जनपद खनिज प्रतिष्ठान के समक्ष रखने का कारण करना होगा।
ख) वार्षिक रिपोर्ट डिस्ट्रिक्ट मिनेरल फाउंडेशन द्वारा अपने अनुमोदन की तिथि से एक महीने के भीतर राज्य सरकार / केंद्र सरकार को प्रस्तुत की जाएगी / की जानी चाहिए तथा इसे जनपद खनिज प्रतिष्ठान / जिला खनिज फाउंडेशन की वेबसाइट पर भी आयोजित किया जाएगा।
ग) प्रत्येक फाउंडेशन की वार्षिक विवरणी (Annual Report) राज्य विधानसभा (State Level Agency) के समक्ष रखी जाएगी।

Website of the Department- www.mitra.ibm.gov.in/

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