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Pradhan Mantri Laghu Rin Mochan Yojana Application Form Apply Pdf

Pradhan Mantri Laghu Rin Mochan Yojana
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Pradhan Mantri Laghu Rin Mochan Yojana Application Form Apply Pdf प्रधानमंत्री राष्ट्रीय लघु ऋणमोचन योजना:

भारत देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश के लघु अथवा नगण्य ऋण से त्रस्त नागरिकों के लिए शांतिपूर्वक आर्थिक क्षमता में जीवन यापन करने देने के लिए अतिशीघ्र ही “इन्सॉल्वेंसी एंड बैन्क्रप्ट्सी कअउड्” (आईबीसी) (Insolvency & Bankruptcy Code) के फ़्रेश् स्टाट् अथवा अफ़्रेश् स्टार्ट  [जिसका हिंदी भाषा व उर्दू तर्जुमा के अनुसार तात्पर्य “ऋणशोधनाक्षमता तथा ऋणशोधनाक्षम्यता संहिता” अथवा ‘दिवाला व दिवालियापन कूटभाषा’ के अंतर्गत पुनःआरम्भ है] “राष्ट्रीय ऋणमोचन पद्धति” की घोषणा करने के लिए निर्णय लेने की दिशा में अग्रसर हैं । प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी शासन-क्रम (सरकार) का मंत्रिमंडल शीघ्र ही इसके विषय में अधिसूचना निर्गत कर देगा । केंद्रीय मंत्रिमंडल ऋणमोचन सम्बंधित निकष (मानदंड) निर्धारित कर राष्ट्रीय ऋणमोचन योजना ( Pradhan Mantri Laghu Rin Mochan Yojana) के विषय में अधिसूचना का सम्भाव्य निर्गमन सितम्बर अथवा अक्टूबर 2019 माह में कर देगा ।

Pradhan Mantri Laghu Rin Mochan Yojana

कॉर्पोरेट अफ़ेअर्स (समष्टिगत / निगमित विषयों) सचिव इंजेती श्रीनिवास के कथानुसार प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी सरकार आर्थिक रूप से निर्धनवर्ग के लोगों को ऋण से मुक्ति दिलाने के लिए ‘लअउन् वेइव़अ’ अथवा ‘लोन वेवर’ ऋणमोचन / क़र्ज़-माफी की योजना बनाई जा रही है । इसके स्वरूप को लेकर लघु-वित्तीय उद्योगों (माइक्रो फाइनेंस इंडस्ट्री) से विचार विमर्श प्रगति में है। उन्होंने इस पर देते हुए कहा कि यह ऋणमोचन / क़र्ज़ माफी (लोअन् वेइव़अ) व्यक्तिगत ऋणशोधनाक्षमता / निजी दिवालियापन से सम्बद्ध विषयों के आधार पर दी जाएगी जो आर्थिक रूप से निर्धन जनों को सबसे ज्यादा व्यथित करती है। निगमित विषय सचिव ने ऋणशोधनाक्षमता तथा ऋणशोधनाक्षम्यता कूटभाषा “इन्सॉल्वेंसी एंड बैन्क्रप्ट्सी कअउड् के अंतर्गत ऋणधारकों को 05 वर्ष में मात्र एक ही बार लाभ प्राप्य होगा ।

Pradhan Mantri Laghu Rin Mochan Yojana News-

समष्टिगत विषय सचिव (The Corporate Affairs Secretary) ने कहा कि केंद्र सरकार लघुवित्तीय (उद्योगों माइक्रोफाइनेंस इंडस्ट्री) संतुष्टि तथा सुरक्षा के सभी उपायों पर भी काम कर रहे हैं । उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर इस योजना को कार्यान्वयन करने के लिए तीन से चार वर्ष में सरकार पर ₹ 10,000 करोड़ का अतिरिक्त वजन पड़ने की संभावना है ।

इसके अतिरिक्त लघु-वित्तीय उद्योग जगत (माइक्रोफाइनेंस इंडस्ट्री) की चिंताओं का विचार रखने व चिंताओं का पूरा ध्यान रखा गया है। उन्होंने बताया कि इसमें व्यक्तिगत योग्यता के आधार पर समस्त लघु व त्रस्त में ऋणधारकों को राहत देना है। योग्यता की निबंधों पर माइक्रोफाइनेंस इंडस्ट्री के साथ विस्तृत चर्चा की गई थी। आईबीसी प्रावधानों के तहत कॉर्पोरेट डेट् / कॉर्पोरेट डेब्ट को लेकर वैयक्तिक प्रत्याभूतिदाता (पअसनअल् गैरन्टॉर) के विषय में भी निर्देश निर्गत किये जावेंगे । इसके अतिरिक्त तत्पश्चात सहभागिता एवं स्वामित्व (पाट्नशिप् ऐन्ड् प्रअप्राइअटअशिप्) के विषय में विस्तृत दिशानिर्देश निर्गत किए जावेंगे ।

प्रधानमंत्री राष्ट्रीय लघु ऋणमोचन योजना – निकष:

उपलब्ध समाचार के अनुसार प्रधानमंत्री सरकार द्वारा राष्ट्रीय ऋणमोचन नीति के सन्दर्भ में ऋणशोधनाक्षमता तथा ऋणशोधनाक्षम्यता संहिता (इन्सॉल्वेंसी एंड बैन्क्रप्ट्सी कअउड्) निम्नोल्लेखित निकष (मानदंड) प्रावधान को समाविष्ट किये जाने का प्रावधान है:

ऋणशोधनाक्षमता तथा ऋणशोधनाक्षम्यता संहिता अथवा दिवाला व दिवालियापन कूटभाषा “इन्सॉल्वेंसी एंड बैन्क्रप्ट्सी कअउड्” (आईबीसी) (Insolvency & Bankruptcy Code) (IBC) के फ़्रेश् स्टाट् (नवीन आरम्भ) अथवा अफ़्रेश् स्टार्ट (पुनःआरम्भ) प्रावधानों के अंतर्गत किये जाने की संभावना है । केंद्र शासन इस को लेकर योजना तैयार हो रही है। अतः राष्ट्रीय ऋणमोचन पद्धति के सन्दर्भ में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा निर्गत इन्सॉल्वेंसी एंड बैन्क्रप्ट्सी कअउड् रूल्स एंड रेगुलेशंस (ऋणशोधनाक्षमता तथा ऋणशोधनाक्षम्यता संहिता नियम व निबंधन का विस्तृत उल्लेख होगा ।
01) कि “इन्सॉल्वेंसी एंड बैन्क्रप्ट्सी कअउड्” (Insolvency & Bankruptcy Code) लघु ऋणधारकों (लअउन् बेअरअस् / लोन-बेअरर्स) के ऋणमोचन की योजना किन्तु उनके द्वारा देय ऋण राशि समुच्चय ऋण ₹ 35 हजार (₹ पेंतीस हजार) से अधिक नहीं होवे ।
02) कि ऋणशोधनाक्षमता तथा ऋणशोधनाक्षम्यता संहिता अथवा दिवाला व दिवालियापन कूटभाषा “इन्सॉल्वेंसी एंड बैन्क्रप्ट्सी कअउड्” (आईबीसी) (Insolvency & Bankruptcy Code) (IBC) के फ़्रेश् स्टाट् (नवीन आरम्भ) अथवा अफ़्रेश् स्टार्ट (पुनःआरम्भ) के अंतर्गत ऋण धारकों (लोन बेअरर्स) अन्य अधित्यजन के हित में दिए जाने ऋण क्षमा / छूट / माफ़ी दिए जाने के लिए प्रावधान की संभावना है।
03) कि ऋणधारक की समस्त स्रोतों से अर्जित वार्षिक आय ₹ 60,000 (₹ साठ हजार) से नहीं होनी चाहिए, तथा उनकी एसेटएसेट की मार्केट वैल्यू ₹ 20,000 (₹ बीस हजार) से ज्यादा नहीं होनी चाहिए ।
04) कि लघु ऋण-धारक के स्वामित्व में वैयक्तिक गृह भी नहीं होना चाहिए ।

ऋणशोधनाक्षमता तथा ऋणशोधनाक्षम्यता कूटभाषा – विशिष्ट केंद्र बिन्दु:

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ऋणशोधनाक्षमता तथा ऋणशोधनाक्षम्यता संहिता अथवा दिवाला व दिवालियापन कूटभाषा “इन्सॉल्वेंसी एंड बैन्क्रप्ट्सी कअउड् के अंतर्गत ऋणधारकों को 05 वर्ष में मात्र एक ही बार लाभ प्राप्य होगा। अर्थात किसी भी ऋण धारक द्वारा आरम्भ में लिए लाभ के पश्चात पुनः लाभग्राही बनने का अवसर प्राप्त नहीं होगा ।

Website of the Department- www.agriculture.gov.in/

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